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Bihar Road Accident: सड़क हादसे में घायलों को 7 दिन तक मिलेगा 1.50 लाख का कैशलेस इलाज, बिहार में तैयारी तेज

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में PM राहत योजना लागू करने की तैयारी तेज। सड़क हादसे में पात्र घायलों को सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस इलाज मिलेगा। जानिए योजना की पूरी जानकारी।

5 नवंबर 2026 | Alam Ki Khabar


बिहार में सड़क हादसे के घायलों को मिलेगी बड़ी राहत, 7 दिनों तक 1.50 लाख रुपये का कैशलेस इलाज


पटना: बिहार में सड़क दुर्घटनाओं के बाद घायलों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने पहल तेज कर दी है। अब पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को इलाज के लिए तत्काल पैसों की व्यवस्था करने की परेशानी से राहत मिल सकेगी। प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दुर्घटना में घायल पात्र लोगों को अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।


योजना को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने परिवहन, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग के बीच समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया है। इसी सिलसिले में बुधवार को पटना के पुराने सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में राज्यस्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें संबंधित विभागों के अधिकारियों और अस्पताल प्रतिनिधियों को योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी जिम्मेदारियों की जानकारी दी गई।


गोल्डेन ऑवर में इलाज मिलने से बच सकती हैं जानें


कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने कहा कि सड़क दुर्घटना के बाद शुरुआती एक घंटा यानी गोल्डेन ऑवर घायल व्यक्ति के लिए बेहद अहम होता है। इस दौरान उचित चिकित्सा सुविधा मिलना जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


अक्सर हादसे के बाद घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने और इलाज शुरू कराने में देरी हो जाती है। कई मामलों में आर्थिक परेशानी भी उपचार में बाधा बनती है। सरकार की कोशिश है कि ऐसी परिस्थितियों में पात्र पीड़ितों को बिना अनावश्यक देरी के इलाज मिल सके।


अस्पतालों को पंजीकरण और इलाज के निर्देश


योजना के सफल संचालन के लिए अस्पतालों को सड़क दुर्घटना के पात्र पीड़ितों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करने को कहा गया है। साथ ही अस्पताल प्रबंधन को उपचार के दौरान संवेदनशीलता बरतने और कैशलेस इलाज की प्रक्रिया को सुचारु रखने की जिम्मेदारी दी गई है।


परिवहन विभाग के सचिव राज कुमार ने कहा कि योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने योजना के प्रचार-प्रसार और अस्पतालों में इसकी जानकारी उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया।


अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर मिलेगी


दुर्घटना के समय सबसे बड़ी चुनौती नजदीकी अस्पताल तक पहुंचने की होती है। इसे ध्यान में रखते हुए योजना से जुड़े अस्पतालों की जानकारी गूगल मैप पर उपलब्ध कराने की बात कही गई है।


इसके अलावा सरकारी और निजी अस्पतालों में योजना से संबंधित सूचना बोर्ड लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों के किनारे होर्डिंग के माध्यम से भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।


डायल-112 और टीएमएस 2.0 की होगी अहम भूमिका


कार्यशाला में राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन ने बताया कि योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को सात दिनों तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये का कैशलेस उपचार उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।


इस दौरान डायल-112 की भूमिका, टीएमएस 2.0 पोर्टल पर दुर्घटना पीड़ितों का पंजीकरण, पुलिस सत्यापन और आईरैड/ईडार प्रणाली के उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी गई।


पुलिस उप महानिरीक्षक रामा शंकर राय ने डायल-112 की जिम्मेदारियों को समझाया। वहीं, सड़क सुरक्षा से जुड़े राजीव कुमार ने टीएमएस 2.0 पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया का प्रशिक्षण दिया। स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों की भूमिका, कैशलेस उपचार और क्लेम से संबंधित प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।


कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद


राज्यस्तरीय कार्यशाला में अपर पुलिस महानिदेशक अमित लोढ़ा, डीआईजी यातायात सुशांत सरोज, परिवहन विभाग के अपर सचिव प्रवीण कुमार और पटना के ट्रैफिक एसपी सागर कुमार झा समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।


योजना की असली सफलता समय पर इलाज मिलने से तय होगी


सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति और उसके परिजनों के लिए शुरुआती समय बेहद मुश्किल होता है। ऐसे में कैशलेस इलाज की व्यवस्था बड़ी राहत साबित हो सकती है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब दुर्घटना की सूचना मिलते ही एंबुलेंस पहुंचे, अस्पताल बिना अनावश्यक देरी के उपचार शुरू करे और पंजीकरण व सत्यापन की प्रक्रिया सरल रहे।


अब बिहार में इस योजना की सफलता इस बात से तय होगी कि सरकारी स्तर पर बनाई गई व्यवस्था दुर्घटना के समय जरूरतमंद लोगों तक कितनी तेजी से पहुंचती है।


पूरी खबर पढ़ने के लिए Alam Ki Khabar पढ़ें।


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